दुनियावी इतिहास का अहिंसक बादशाह - महात्मा गाँधी
बिहार के कस्बों और शहरों में निकाय चुनाव के मुनादी के उपरांत वार्ड-प्रखंड की संकीर्ण गलियों एवं बेतरतीब से बसे मोहल्लों में उम्मीदवारों और भावी सदस्यों का प्रचार जोर पकड़ चुका है । चौक चौराहे पे चाय और चौमिन पे जारी चर्चा के बीच उम्मीदवार का जीत और हार का अनुमान इस बात से लगाया जा रहा कि "फलाने उम्मीदवार का प्रचार कितने स्कार्पियो से हो रहा", "फलाने चचा चुनाव में इतना पैसा खर्च कर रहे" आदि इत्यादि । आम तौर पे देश में महंगी हो चुकी चुनावी राजनीती का असर अब निकाय चुनावों पे भी दिखने लगा है । पिछले डेढ़ दशक में गाँधी के इस ग्राम-स्वराज की कल्पनाओं में लोगों ने कितनी भागीदारी सुनिश्चित की गयी इस बात की पुष्टि करना शायद मुश्किल हो, परन्तु महिंद्रा स्कार्पियो ने इन चुनावों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने कोई मौका हाथ से जाने नहीं दिया । भावी वार्ड पार्षद के कदम से कदम मिलकर चलता महिंद्रा स्कार्पियो न जाने कितने तंग गली-मोहल्लों से गुजरता हुआ साफ़ सड़क का वादा कर, उम्मीदवार के राजनीतिक सफर को गती प्रदान करता है । राजनीती में यात्रायों का अपना एक अहम् स्थान है । हम यात्रा कर...