हथरस

हॉस्पिटल के बेड से लिखे स्वर्गीय रघुवंश बाबू की चिट्ठी का विवरण देती मीडिया से हथरस की पीड़िता का अंतिम बयान मत पूछिए, देश में दीपिका और ड्रग्स जैसे गंभीर मुद्दे हैं ।
वैसे जान कर क्या कर लेंगे, फेसबुक पे कैंपेन या व्हाट्सप्प पे फॉरवर्ड ? मेरी मानिये इससे कुछ नहीं होता, जिस हल्केपन से आप रीट्वीट और शेयर करते हैं, उसी हल्केपन आप समझे भी जाते हैं ।
तभी तो बाईस सितम्बर तक इस मामले की जांच में रेप जैसे संगीन अपराध की जांच करना भी पुलिस उचित नहीं समझ रही थी । इंसाफ और जिंदगी की जंग लड़ती पीड़िता, जिंदगी की जंग तो हार गयी । आधी रात को बिना परिजनों के पीड़िता का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया ।
समाज इन तस्वीरों तो देख कर आग-बबूला हो रहा है । "गाड़ी पलटवा दो सरकार" और "हैदराबाद का एनकाउंटर न्याय" लोगो के नारों में जगह बना रहा है । देश में कानून के नदारथ होने की गवाही देती जनता रीट्वीट कर रही है । बलात्कार और हत्या जैसे संगीन घटना के बाद समाज को कानून में कमी दिखा कर अपराधियों को सुरक्षा देती राजनीती अपने समाज में आम हो चली है ।
हर बड़ी घटना के बाद लोगों का कानून से विश्वास उठ जाता है, लोग बदले की भावना से ग्रसित होकर हुँकार भरने लगते हैं । मुझे ऐसे लोग चम्पू और अनपढ़ प्रतीत होते हैं ।
भाई, कानून में बदलाव तब की जाती है, जब कानून को सही तरिके से इस्तेमाल करने पे भी मुजरिम छूट जाये । यहाँ, ज्यादातर मामलों में स्टेट केस नहीं स्थापित कर पाती, चार्जशीट दाखिल करने में साल लग जाता है, और आप कानून बदलने की पैरवी कर रहे हैं । कानून में बदलाव से अगर अपराध कम जाते हैं, तो मेरे समझ से एक स्थाई संसोधन मंत्रालय बना देना चाहिए । जनता को संशोधन का लोल्लिपोप देकर, ठगने से अपराध में कोई कमी नहीं आती ।
प्रॉसिक्यूशन नाम की सरकारी व्यवस्था कैसे वकीलों के आभाव में काम कर रही है, इस बात का जिक्र कोई सरकार नहीं करना चाहती ।
कानून में बदलाव आसान काम है, और यह मंत्री जी के अर्थशास्त्र को भी पसंद है । 
बाकि फेसबुक पे स्टेटस के लिए "जस्टिस फॉर फलाना-चिलाना ठीक है, पर असल मायने में न्याय शब्द का मतलब आपको पता नहीं है। जस्टिस जैसा बड़े शब्द का भार पीड़िता के परिजनों से पूछ लीजियेगा, नियति ने जिनके हिस्से आज से कोर्ट और थाने के चक्कर निहित किया है । मौत पे मातम के बाद, न्याय की लड़ाई आपके सोशल मीडिया आउटरेज के तरह आसान नहीं है ।

आपके उधार के कॉपी की हुई स्टेटस और दिमागी खोखलापन से देश तबाह हो गया है । उत्तर-प्रदेश की घटना मानवता को शर्मशार कर रही है । उसी मानवता को, जिसे हर रोज हम अपने अंदर मार रहे हैं, जाती और धर्म का हवाला देकर ।

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