उत्तर प्रदेश के ब्राह्मणो के नाम एक पत्र :-

ये उत्तर प्रदेश के कौन से ब्राह्मण मतदाता हैं, जो इंसान नहीं है, सिर्फ मतदाता हैं । खीरी इलाके के वो कौन से ब्राह्मण हैं, जिन्हें पूरे समाज में सिर्फ एक हत्यारोपी में नेता दिख रहा है । ऐसे समाज को मैं नहीं जानता । जिन्हें मैं नहीं जानता उन्हीं के नाम पे पत्र लिख रहा हूँ ।


डिअर उत्तर प्रदेश के ब्राह्मणों,

लखीमपुर में किसानों पे चढ़ती जीप और फार्चूनर ने आठ घरों में अफ़सोस और संताप के सिवा कुछ नहीं छोड़ा । उनके परिजन/बच्चे घर नहीं लौटे, जो दंगल और प्रदर्शन के बाद लौट आने का वादा कर घर से निकले थे ।
सरकार और राजनीती अपने हिसाब से जिंदगी को आंकड़े और मुआवज़े को सांत्वना के तौर पे पेश कर खुद को राजनीती के मापदंड और मास्टरस्ट्रोक के द्वन्द में उलझा कर व्यस्त दिखाने लगी है । पुलिसीआ जाँच के नाम पे कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया । एक नामजद अभियुक्त की गिरफ़्तारी हेतु आपके (ब्राह्मण) पहचान और वोट के मद्देनजर विशेषाधिकार भी मुहैया कराया गया, ताकि आपके भीतर का ब्राह्मण और मंत्री की कुर्सी आहात न हो ।
इन सब के उपरांत सरकार आश्वस्त है "ब्राह्मणो के नेता एवं हत्यारोपी को विशेषाधिकार देकर उसने आपके भीतर के ब्राह्मण को संतुष्ट किया है । सरकार आगामी चुनाव में आपके वोट की अभिलाषी है ।  
मताधिकार आपका निजी फैसला है । आप जिसे चाहे वोट कर जीता या हरा दें । पर मताधिकार के फैसले के उपरांत इस बात पर जरूर विचार करें कि "आपके एक वोट ने किसी लोकतान्त्रिक मुल्क के सरकार को एक हत्यारोपी के साथ खड़ा कर दिया"।
मुझे पता है आप में से अधिकांश इस फैसले के समर्थक नहीं होंगे । मुझे मालूम है आपमें इन्साफ और न्याय की संभावनाएं अभी भी बाकि है । पर ऐसे मताधिकार का आप क्या करेंगे जिसे पाने की चाहत में कोई किसी पे जीप चढ़ा दे रहा है ? 
एक समाज के तौर पे हमें ऐसे लोगों से किनारा कर लेना चाहिए जो हमें हत्यारे के श्रेणी में खड़ा कर दे । और अगर आप ऐसा नहीं कर पाएं तो मेरी बात लिख कर जेब में रख लें - जिस रास्ते आप एक हत्यारोपी को अपना नेता समझ रहें हैं, वो एक दिन आपके घरों पर भी दस्तक देगा । आपके किसी अपने की जान ले लेगा और सरकारें फिर उसे आपके वोट के नाम पे बचा लेंगी और तब आपको खुद का वोट सबसे भारी लगेगा ।
ऐसे लोगों को समाजिक पहचान देना आपमें इंसान होने की संभावनाएं समाप्त कर देगा ।
जब कभी वो आपका वोट मांगने आये तो उनसे कहियेगा - "सुनो तुम्हे मेरा वोट चाहिए न, मैं दे दूंगा वोट - पर हमारी हत्यारोपी पहचान मत बनाओ । विद्वता हमारी विरासत है ।

गाँधी के इस मुल्क में हत्यारोपी को किसी वर्ग के नेता होने की ढील देने लगें, तो न्याय के नाम की लीपा-पोती के अलावा नागरिक समाज को कुछ नहीं मिलेगा ।

संस्कृत के विद्वता वाले समाज से एक श्लोक के साथ विदा लेता हूँ :-
नयति इति नेता - जो आगे लेकर चले वो नेता । 

आपका
राहुल सिंह 

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